रॉकेट क्या है ? और ये कैसे काम करती है? हिंदी में पुरी जानकारी !

दोस्तों हम आज जानेंगे कि रॉकेट क्या है और ये कैसे काम करता है ! आप लोग तो रॉकेट के नाम से तो परिचित होंगे; अगर आप इनके बारे में नहीं जानते तो आज हम रॉकेट के ही बारे में ही जानेंगे !

रॉकेट क्या है?

रॉकेट एक प्रकार का वायुयान है ! यह एक ऐसा वायुयान है जिसको किसी भी वातावरण में उड़ा सकते है! रॉकेट को उड़ाने के लिए एरोप्लेन कि तरह हवा कि जरूरत नहीं होती; बल्कि यह धरती के किसी भी वातावरण में यह उड़ सकता है ! धरती पर एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाने के लिए एरोप्लेन का अविष्कार हुआ था; लेकिन पृथ्वी से बाहर जाने के लिए यानी अंतरिक्ष में जाना के लिए रॉकेट का अविष्कार किया गया ! आज हम रॉकेट के वजह से ही नयी-नयी खोजो को जानते है; और हमारे देश में वैज्ञानिको ने बहुत से खोज किया और आज भी वैज्ञानिको ने धरती से बाहर दुसरे ग्रहों पर जीवन व्यतीत करने खोज चल रही हैं ! अब आप जान गए होंगे कि रॉकेट क्या है ?

रॉकेट कैसे काम करता है और ये ऊपर कैसे जाती है ?

Rocket upar kaise jata hai
Rocket upar kaise jata hai

आप ने यह जरुर देखा होगा कि जब किसी भी रॉकेट को छोड़ा जाता है; तो रॉकेट के नीचे आग कि एक पूंछ निकली होती है और उससे आग और धुँआ निकलती रहती है; जिससे रॉकेट ऊपर कि ओर जाने लगता है !अगर हम बात करें कि रॉकेट में आग कैसे और क्यों लगाई जाती है तो दरसल रॉकेट में ईंधन जलता है; जिससे गर्म गैस अधिक से अधिक मात्रा में निकलती है; और वह नीचे कि ओर बहुत जोर धक्का देती है जिससे वह रॉकेट ऊपर कि ओर जाने लगता है !

राकेट के स्पेस शटल में रहता क्या है ?

तो हम बता दे कि स्पेस शटल (यानि राकेट में) में तरल हाइड्रोजन और ठोस प्रोपालेंट का उपयोग किया जाता है; जो ठोस प्रोपालेंट जलता रहा है लेकिन विस्फोटक नहीं होता है जिससे रॉकेट विस्फोट नहीं होता है! और उसको जहाँ पर  जाना रहता है बिना विस्फोट हुए वह चला जाता है !

यदि हम बात करे गुरुत्वाकर्षण के कारण तो रॉकेट  को पृथ्वी से बाहर निकाना कोई असान काम नहीं होता है; रॉकेट के एक बंद चैंबर में विस्फोटक कार्य होता रहता है; जिससे पीछे कि ओर से धक्का मिलती रहती है! इसी उर्जा के कारण रॉकेट का इंजन 16,000 कि.मी.प्रति घंटे ( हर रॉकेट का रफ्तार अलग-अलग होता है ) के रफ्तार से रॉकेट जमीन से ऊपर उठता है! कुछ देर बाद रॉकेट ईंधन टैंक खली हो जाता है तब तक रॉकेट बहुत दूर अंतरिक्ष में या अन्य जगह जहा उसे भेजते वह वहा चला जाता है !

रॉकेट किस सिद्धांत पर बना है?

रॉकेट का उड़ने का सिद्धांत न्यूटन के तीसरे नियम क्रिया-प्रतिक्रिया पर आधारित है ! इसमें  में तरल आक्सीजन को ईंधन के रूप जलाया जाता है जिससे उच्च दाब पर गैस उत्पन्न होती है! और वह गैस रॉकेट के पीछे से बहुत तेजी से वह गैस निकलती है; और वह पीछे से आगे कि ओर बहुत तेजी से धक्का देती जिससे प्रतिक्रिया होती है ! जिसके फलस्वरूप रॉकेट ऊपर जाने लगता हैं !

रॉकेट का अविष्कार किसने और कब किया था?

सबसे पहले रॉकेट का इतिहास 13 वीं सदी से शुरू होता है सबसे पहला रॉकेट का अविष्कार चीन में हुआ था !और  रॉकेट का उपयोग युद्धों में हथियार के रूप में किया जाता था! और यह हथियार बहुत ही खतरनाक हथियार था ! रॉकेट का उपयोग सबसे पहले सन,1232 में किया गया था चीन और मंगोलों के बीच युद्ध में हुआ था !

सन,1926 में, राबर्ट गोडार्ड दुनिया का पहला तरल ईंधन रॉकेट शुरू किया था! और 16 मार्च, 1926 को आबर्न, मैसचुसेट्स,पर दुनिया कि पहली तरल ईंधन रॉकेट प्रक्षेपण था ! जोकि 60 मील प्रति घंटासे दूर लैंडिंग 184 फुट कि उंचाई तक पहुच गया ! और रॉकेट कि लम्बाई 10 फुट था और इसमें जो ईंधन का प्रयोग हुआ था वह ईंधन तरल ईंधन आक्सीजन और पेट्रोल था !

सन 1907 में बारूद रॉकेट का निर्माण हुआ जिसको युद्धों में एक खतरनाक हथियार के रूप किया जाता है !

हमें आशा है कि रॉकेट क्या है यह पोस्ट आपको पसंद आएगा; अगर पसंद आये तो दोस्तों के साथ इसे अवश्य शेयर करें !

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